यज्ञ के रूप में किया कर्म किसी को नहीं बाँधता
यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र
लोकोऽयं कर्मबन्धनः
यज्ञ के निमित्त किये जाने वाले कर्मों से अतिरिक्त दूसरे कर्मों में लगा हुआ ही यह मनुष्य समुदाय कर्मों से बँधता है। इसलिये हे अर्जुन! तू आसक्ति से रहित होकर उस यज्ञ के…



