आज का श्लोक · भगवद्गीता 8.17
सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो विदुः
रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जनाः
॥ ८.१७ ॥
sahasrayugaparyantamaharyadbrahmaṇo viduḥ| rātriṃ yugasahasrāntāṃ te'horātravido janāḥ||
भगवद्गीता — पढ़ें, सुनें, अभ्यास करें। मुक्त और विज्ञापन-रहित।
नाम की कहानी, 84 सेकंड में
Deep, और दीप।
अंग्रेज़ी में deep यानी गहरा; हिंदी में दीप यानी दीया। एक नन्हा दीया दिखाता है कि गीतादीप किसलिए है — श्लोक, हर शब्द का अर्थ, छह आचार्य साथ-साथ, और आपके अपने प्रश्न।
वीडियो अंग्रेज़ी में है, अंग्रेज़ी उपशीर्षक के साथ।
गीता से पूछें
कोई प्रश्न लेकर आइए। उत्तर श्लोकों से ही आता है।
- आज का प्रश्नऐसा क्या है जिससे मैं इतना प्रेम करता हूँ कि बार-बार उसी की ओर लौट आता हूँ?
- गीता क्रोध के बारे में क्या कहती है?
- बिना आसक्ति के कर्म कैसे करूँ?
हर उत्तर अपने श्लोकों का हवाला देता है। एक अध्ययन-सहचर — गुरु नहीं।