पूरा पाठ

अठारह अध्याय, अपने तीन षट्कों में

700 श्लोक संस्कृत में, IAST लिप्यंतरण और सार्वजनिक-डोमेन अनुवाद के साथ। गीता तीन योगों — कर्म, भक्ति, ज्ञान — की क्रमिक यात्रा की तरह पढ़ी जाती है। कहीं से भी शुरू करें; पाठ आपको थामेगा।

स्वर — पच्चीस शताब्दियों में पाठकों ने इसमें क्या देखाअवधारणाएँ — अर्जुन ने जो प्रश्न पूछे

कर्म षट्क · अध्याय 1–6

कर्मयोग — फल की पकड़ छोड़े हुए किया गया कर्तव्य।

भक्ति षट्क · अध्याय 7–12

भक्तियोग — दिव्य के प्रति प्रेम और समर्पण।

ज्ञान षट्क · अध्याय 13–18

ज्ञानयोग — क्षेत्र से शाश्वत आत्मा का विवेक।