ब्राह्मी स्थिति — अंत-क्षण में भी मोह नहीं
एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ
नैनां प्राप्य विमुह्यति
हे अर्जुन! यह ब्रह्म को प्राप्त पुरुष की स्थिति है, इसको प्राप्त होकर योगी कभी मोहित नहीं होता और अन्त काल में भी इस ब्राह्मी स्थिति में स्थित होकर ब्रह्मानन्द को…



