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Guṇatraya Vibhāga Yoga

गुणत्रय विभाग योग · अध्याय 14:

आज की लय

सुनें · 14.23–14.27
सस्वर पाठ
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5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

इस समय कौन-सा भाव मुझे चला रहा है — और क्या मैं उसे बस देख भर सकता हूँ?

उदासीनवदासीनो गुणैर्यो न विचाल्यते

गुणा वर्तन्त इत्येव योऽवतिष्ठति नेङ्गते

॥ १४.२३ ॥

जो साक्षी के सदृश स्थित हुआ गुणों के द्वारा विचलित नहीं किया जा सकता और गुण ही गुणों में बरतते हैं—ऐसा समझता हुआ जो सच्चिदानन्दधन परमात्मा में एकीभाव से स्थित रहता है एवं उस स्थिति से कभी विचलित नहीं होता।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है