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Guṇatraya Vibhāga Yoga

गुणत्रय विभाग योग · अध्याय 14:

आज की लय

सुनें · 14.18–14.22
सस्वर पाठ
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5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

इस समय कौन-सा भाव मुझे चला रहा है — और क्या मैं उसे बस देख भर सकता हूँ?

ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः

जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः

॥ १४.१८ ॥

सत्त्वगुण में स्थित पुरुष स्वर्गादि उच्च लोकों को जाते हैं, रजोगुण में स्थित राजस पुरुष मध्य में अर्थात् मनुष्यलोक में ही रहते हैं और तमोगुण के कार्यरूप निद्रा, प्रमाद और आलस्यादि में स्थित तामस पुरुष अधोगति को अर्थात् कीट, पशु आदि नीच योनियों को तथा नरकों को प्राप्त होते हैं।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है