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Kṣetra Kṣetrajña Vibhāga Yoga
क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग · अध्याय 13:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 13.30–13.34
सस्वर पाठ
पढ़ें · 13.30–13.34
5 श्लोक · अनुवाद
मनन
वह कौन है जो इस सबको चुपचाप बीतते हुए देख रहा है?
यदा भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति
तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा
॥ १३.३० ॥
जिस क्षण यह पुरुष भूतों के पृथक्-पृथक् भाव को एक परमात्मा में ही स्थित तथा उस परमात्मा से ही सम्पूर्ण भूतों का विस्तार देखता है, उसी क्षण वह सच्चिदानन्दघन ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है