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Kṣetra Kṣetrajña Vibhāga Yoga

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग · अध्याय 13:

आज की लय

सुनें · 13.19–13.24
सस्वर पाठ
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6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

वह कौन है जो इस सबको चुपचाप बीतते हुए देख रहा है?

प्रकृतिं पुरुषं चैव विद्ध्यनादी उभावपि

विकारांश्च गुणांश्चैव विद्धि प्रकृतिसंभवान्

॥ १३.१९ ॥

प्रकृति और पुरुष, इन दोनों को ही तू अनादि जान। और राग-द्वेषादि विकारों को तथा त्रिगुणात्मक सम्पूर्ण पदार्थों को भी प्रकृति से ही उत्पन्न जान।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है