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Kṣetra Kṣetrajña Vibhāga Yoga
क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग · अध्याय 13:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 13.7–13.12
सस्वर पाठ
पढ़ें · 13.7–13.12
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
वह कौन है जो इस सबको चुपचाप बीतते हुए देख रहा है?
अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम्
आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः
॥ १३.७ ॥
श्रेष्ठता के अभिमान का अभाव, दम्भाचरण का अभाव, किसी भी प्राणी को किसी प्रकार भी न सताना, क्षमाभाव, मन-वाणी आदि की सरलता, श्रद्धा-भक्ति सहित गुरु की सेवा, बाहर-भीतर की शुद्धि, अन्तःकरण की स्थिरता और मन-इन्द्रियों सहित शरीर का निग्रह।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है