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Bhakti Yoga

भक्ति योग · अध्याय 12:

आज की लय

सुनें · 12.16–12.20
सस्वर पाठ
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5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

ऐसा क्या है जिससे मैं इतना प्रेम करता हूँ कि बार-बार उसी की ओर लौट आता हूँ?

अनपेक्षः शुचिर्दक्ष उदासीनो गतव्यथः

सर्वारम्भपरित्यागी यो मद्भक्तः स मे प्रियः

॥ १२.१६ ॥

जो पुरुष आकांक्षा से रहित, बाहर-भीतर से शुद्ध, वतुर, पक्षपात से रहित और दुःखों से छूटा हुआ है—वह सब आरम्भों का त्यागी मेरा भक्त मुझको प्रिय है।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है