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Bhakti Yoga

भक्ति योग · अध्याय 12:

आज की लय

सुनें · 12.11–12.15
सस्वर पाठ
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5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

ऐसा क्या है जिससे मैं इतना प्रेम करता हूँ कि बार-बार उसी की ओर लौट आता हूँ?

अथैतदप्यशक्तोऽसि कर्तुं मद्योगमाश्रितः

सर्वकर्मफलत्यागं ततः कुरु यतात्मवान्

॥ १२.११ ॥

यदि मेरी प्राप्ति रूप योग के आश्रित होकर उपर्युक्त साधन को करने में भी तू असमर्थ है तो मन-बुद्धि आदि पर विजय प्राप्त करने वाला होकर सब कर्मों के फल का त्याग कर।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है