दिन 8 / 126

Arjuna Viṣāda Yoga

अर्जुन विषाद योग · अध्याय 1:

आज की लय

सुनें · 1.43–1.47
सस्वर पाठ
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5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

वह कौन-सा भय है जो मुझे अपना धनुष रख देने को विवश करता है?

दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसङ्करकारकैः

उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः

॥ १.४३ ॥

इन वर्णसंकरकारक दोषों से कुलघातियों के सनातन कुल-धर्म और जाति-धर्म नष्ट हो जाते हैं।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है