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Viśvarūpa Darśana Yoga

विश्वरूप दर्शन योग · अध्याय 11:

आज की लय

सुनें · 11.13–11.18
सस्वर पाठ
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6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

ऐसा क्या है जो मेरे समेटने से परे है — और क्या मैं उसे विशाल ही रहने दे सकता हूँ?

तत्रैकस्थं जगत्कृत्स्नं प्रविभक्तमनेकधा

अपश्यद्देवदेवस्य शरीरे पाण्डवस्तदा

॥ ११.१३ ॥

पाण्डु पुत्र अर्जुन ने उस समय अनेक प्रकार से विभक्त अर्थात् पृथक्-पृथक् सम्पूर्ण जगत् को देवों के देव श्रीकृष्ण भगवान् के उस शरीर में एक जगह स्थित देखा।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है