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Viśvarūpa Darśana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग · अध्याय 11:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 11.7–11.12
सस्वर पाठ
पढ़ें · 11.7–11.12
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
ऐसा क्या है जो मेरे समेटने से परे है — और क्या मैं उसे विशाल ही रहने दे सकता हूँ?
इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम्
मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टुमिच्छसि
॥ ११.७ ॥
हे अर्जुन! अब इस मेरे शरीर में एक जगह स्थित चराचरसहित सम्पूर्ण जगत् को देख तथा और भी जो कुछ देखना चाहता हो सो देख।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है