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Viśvarūpa Darśana Yoga

विश्वरूप दर्शन योग · अध्याय 11:

आज की लय

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सस्वर पाठ
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6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

ऐसा क्या है जो मेरे समेटने से परे है — और क्या मैं उसे विशाल ही रहने दे सकता हूँ?

इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम्

मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टुमिच्छसि

॥ ११.७ ॥

हे अर्जुन! अब इस मेरे शरीर में एक जगह स्थित चराचरसहित सम्पूर्ण जगत् को देख तथा और भी जो कुछ देखना चाहता हो सो देख।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है