दिन 75 / 126
Viśvarūpa Darśana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग · अध्याय 11:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 11.1–11.6
सस्वर पाठ
पढ़ें · 11.1–11.6
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
ऐसा क्या है जो मेरे समेटने से परे है — और क्या मैं उसे विशाल ही रहने दे सकता हूँ?
अर्जुन उवाच
मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम्
यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम
॥ ११.१ ॥
अर्जुन बोले-मुझ पर अनुग्रह करने के लिये आपने जो परम गोपनीय अध्यात्मविषयक वचन अर्थात् उपदेश कहा, उससे मेरा यह अज्ञान नष्ट हो गया है।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है