दिन 74 / 126

Vibhūti Yoga

विभूति योग · अध्याय 10:

आज की लय

सुनें · 10.38–10.42
सस्वर पाठ
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पढ़ें · 10.38–10.42
5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

इस साधारण दिन में कहाँ मैं किसी शान्त आभा को देख सकता हूँ?

दण्डो दमयतामस्मि नीतिरस्मि जिगीषताम्

मौनं चैवास्मि गुह्यानां ज्ञानं ज्ञानवतामहम्

॥ १०.३८ ॥

मैं दमन करने वालों का दण्ड अर्थात् दमन करने की शक्ति हूँ, जीतने की इच्छा वालों की नीति हूँ, गुप्त रखने योग्य भावों का रक्षक मौन हूँ और ज्ञानवानों का तत्त्व ज्ञान मैं ही हूँ।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है