दिन 71 / 126
Vibhūti Yoga
विभूति योग · अध्याय 10:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 10.23–10.27
सस्वर पाठ
पढ़ें · 10.23–10.27
5 श्लोक · अनुवाद
मनन
इस साधारण दिन में कहाँ मैं किसी शान्त आभा को देख सकता हूँ?
रुद्राणां शङ्करश्चास्मि वित्तेशो यक्षरक्षसाम्
वसूनां पावकश्चास्मि मेरुः शिखरिणामहम्
॥ १०.२३ ॥
मैं एकादश रुद्रों में शंकर हूँ और यक्ष तथा राक्षसों में धन का स्वामी कुबेर हूँ। मैं आठ वसुओं में अग्नि हूँ और शिखर वाले पर्वतों में सुमेरु पर्वत हूँ।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है