दिन 7 / 126
Arjuna Viṣāda Yoga
अर्जुन विषाद योग · अध्याय 1:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 1.37–1.42
सस्वर पाठ
पढ़ें · 1.37–1.42
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
वह कौन-सा भय है जो मुझे अपना धनुष रख देने को विवश करता है?
तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान्
स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव
॥ १.३७ ॥
अतएव हे माधव! अपने ही बान्धव धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारने के लिये हम योग्य नहीं हैं; क्योंकि अपने ही कुटुम्ब को मारकर हम कैसे सुखी होंगे?
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है