दिन 69 / 126

Vibhūti Yoga

विभूति योग · अध्याय 10:

आज की लय

सुनें · 10.13–10.17
सस्वर पाठ
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पढ़ें · 10.13–10.17
5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

इस साधारण दिन में कहाँ मैं किसी शान्त आभा को देख सकता हूँ?

आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा

असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे

॥ १०.१३ ॥

अर्जुन बोले—आप परम ब्रह्म, परम धाम और परम पवित्र हैं, क्योंकि आपको सब ऋषिगण सनातन, दिव्य पुरुष एवं देवों का भी आदि देव, अजन्मा और सर्वव्यापी कहते हैं। वैसे ही देवर्षि नारद तथा असित और देवल ऋषि तथा महर्षि व्यास भी कहते हैं और स्वयं आप भी मेरे प्रति कहते हैं।

श्लोक 12–13

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है