दिन 68 / 126

Vibhūti Yoga

विभूति योग · अध्याय 10:

आज की लय

सुनें · 10.7–10.12
सस्वर पाठ
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6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

इस साधारण दिन में कहाँ मैं किसी शान्त आभा को देख सकता हूँ?

एतां विभूतिं योगं च मम यो वेत्ति तत्त्वतः

सोऽविकम्पेन योगेन युज्यते नात्र संशयः

॥ १०.७ ॥

जो पुरुष मेरी इस परमैश्वर्य रूप विभूति को और योग शक्ति को तत्त्व से जानता है, वह निश्चल भक्ति योग से युक्त हो जाता है—इसमें कुछ भी संशय नहीं है।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है