दिन 67 / 126
Vibhūti Yoga
विभूति योग · अध्याय 10:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 10.1–10.6
सस्वर पाठ
पढ़ें · 10.1–10.6
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
इस साधारण दिन में कहाँ मैं किसी शान्त आभा को देख सकता हूँ?
श्री भगवानुवाच
भूय एव महाबाहो श्रृणु मे परमं वचः
यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया
॥ १०.१ ॥
श्रीभगवान् बोले-हे महाबाहो! फिर भी मेरे परम रहस्य और प्रभावयुक्त वचन को सुन, जिसे मैं तुझ अतिशय प्रेम रखने वाले के लिये हित की इच्छा से कहूँगा।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है