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Rāja Vidyā Rāja Guhya Yoga

राज विद्या राज गुह्य योग · अध्याय 9:

आज की लय

सुनें · 9.25–9.29
सस्वर पाठ
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पढ़ें · 9.25–9.29
5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

आज मैं कौन-सी छोटी-सी वस्तु सच्चे मन से अर्पित कर सकता हूँ?

यान्ति देवव्रता देवान् पितॄन्यान्ति पितृव्रताः

भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम्

॥ ९.२५ ॥

देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं, पितरों को पूजने वाले पितरों को प्राप्त होते हैं, भूतों को पूजने वाले भूतों को प्राप्त होते हैं और मेरा पूजन करने वाले भक्त मुझ को ही प्राप्त होते हैं। इसीलिये मेरे भक्तों का पुनर्जन्म नहीं होता।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है