दिन 6 / 126
Arjuna Viṣāda Yoga
अर्जुन विषाद योग · अध्याय 1:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 1.31–1.36
सस्वर पाठ
पढ़ें · 1.31–1.36
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
वह कौन-सा भय है जो मुझे अपना धनुष रख देने को विवश करता है?
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव
न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे
॥ १.३१ ॥
हे केशव! मैं लक्षणों को भी विपरीत ही देख रहा हूँ तथा युद्ध में स्वजन-समुदाय को मारकर कल्याण भी नहीं देखता।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है