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Akṣara Brahma Yoga

अक्षर ब्रह्म योग · अध्याय 8:

आज की लय

सुनें · 8.19–8.23
सस्वर पाठ
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5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

यदि यही मेरी अन्तिम साँस हो, तो मेरा मन किस ओर मुड़ेगा?

भूतग्रामः स एवायं भूत्वा भूत्वा प्रलीयते

रात्र्यागमेऽवशः पार्थ प्रभवत्यहरागमे

॥ ८.१९ ॥

हे पार्थ! वहीं यह भूत समुदाय उत्पन्न हो-होकर प्रकृति के वश में हुआ रात्रि के प्रवेश काल में लीन होता है और दिन के प्रवेश काल में फिर उत्पन्न होता है।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है