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Akṣara Brahma Yoga

अक्षर ब्रह्म योग · अध्याय 8:

आज की लय

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6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

यदि यही मेरी अन्तिम साँस हो, तो मेरा मन किस ओर मुड़ेगा?

ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन्

यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्

॥ ८.१३ ॥

सब इन्द्रियों के द्वारों को रोककर तथा मन को हृदेश में स्थिर करके, फिर उस जीते हुए मन के द्वारा प्राण को मस्तक में स्थापित करके, परमात्म संबंधी योगधारणा में स्थित होकर जो पुरुष 'ॐ' इस एक अक्षररूप ब्रह्म का चिन्तन करता हुआ शरीर को त्याग कर जाता है, वह पुरुष परमगति को प्राप्त होता है।

श्लोक 12–13

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है