दिन 57 / 126
Akṣara Brahma Yoga
अक्षर ब्रह्म योग · अध्याय 8:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 8.7–8.12
सस्वर पाठ
पढ़ें · 8.7–8.12
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
यदि यही मेरी अन्तिम साँस हो, तो मेरा मन किस ओर मुड़ेगा?
तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्
॥ ८.७ ॥
इसलिये हे अर्जुन! तू सब समय में निरन्तर मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। इस प्रकार मुझ में अर्पण किये हुए मन-बुद्धि से युक्त होकर तू निःसन्देह मुझ को ही प्राप्त होगा।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है