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Akṣara Brahma Yoga

अक्षर ब्रह्म योग · अध्याय 8:

आज की लय

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सस्वर पाठ
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मनन

यदि यही मेरी अन्तिम साँस हो, तो मेरा मन किस ओर मुड़ेगा?

तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च

मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्

॥ ८.७ ॥

इसलिये हे अर्जुन! तू सब समय में निरन्तर मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। इस प्रकार मुझ में अर्पण किये हुए मन-बुद्धि से युक्त होकर तू निःसन्देह मुझ को ही प्राप्त होगा।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है