दिन 55 / 126
Jñāna Vijñāna Yoga
ज्ञान विज्ञान योग · अध्याय 7:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 7.25–7.30
सस्वर पाठ
पढ़ें · 7.25–7.30
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
ऐसा क्या है जिसे मैं शब्दों में समझता हूँ, पर अब तक जिया नहीं?
नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः
मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम्
॥ ७.२५ ॥
अपनी योगमाया से छिपा हुआ मैं सबके प्रत्यक्ष नहीं होता, इसलिये यह अज्ञानी जनसमुदाय मुझ जन्मरहित अविनाशी परमेश्वर को नहीं जानता अर्थात् मुझको जन्मने-मरनेवाला समझता है।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है