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Jñāna Vijñāna Yoga

ज्ञान विज्ञान योग · अध्याय 7:

आज की लय

सुनें · 7.25–7.30
सस्वर पाठ
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6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

ऐसा क्या है जिसे मैं शब्दों में समझता हूँ, पर अब तक जिया नहीं?

नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः

मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम्

॥ ७.२५ ॥

अपनी योगमाया से छिपा हुआ मैं सबके प्रत्यक्ष नहीं होता, इसलिये यह अज्ञानी जनसमुदाय मुझ जन्मरहित अविनाशी परमेश्वर को नहीं जानता अर्थात् मुझको जन्मने-मरनेवाला समझता है।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है