दिन 53 / 126
Jñāna Vijñāna Yoga
ज्ञान विज्ञान योग · अध्याय 7:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 7.13–7.18
सस्वर पाठ
पढ़ें · 7.13–7.18
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
ऐसा क्या है जिसे मैं शब्दों में समझता हूँ, पर अब तक जिया नहीं?
त्रिभिर्गुणमयैर्भावैरेभिः सर्वमिदं जगत्
मोहितं नाभिजानाति मामेभ्यः परमव्ययम्
॥ ७.१३ ॥
गुणों के कार्यरूप सात्त्विक, राजस और तामस—इन तीनों प्रकार के भावों से यह सब संसार—प्राणि-समुदाय मोहित हो रहा है, इसीलिये इन तीनों गुणों से परे मुझ अविनाशी को नहीं जानता।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है