दिन 49 / 126

Dhyāna Yoga

ध्यान योग · अध्याय 6:

आज की लय

सुनें · 6.37–6.42
सस्वर पाठ
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6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

जब मन भटक जाता है, तब मैं उसे कितनी कोमलता से वापस ले आ सकता हूँ?

अर्जुन उवाच

अयतिः श्रद्धयोपेतो योगाच्चलितमानसः

अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां गतिं कृष्ण गच्छति

॥ ६.३७ ॥

अर्जुन बोले—हे श्रीकृष्ण! जो योग में श्रद्धा रखने वाला है, किंतु संयमी नहीं है, इस कारण जिसका मन अन्तकाल में योग से विचलित हो गया है, ऐसा साधक योग की सिद्धि को अर्थात् भगवत्साक्षात्कार को न प्राप्त होकर किस गति को प्राप्त होता है?

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है