दिन 48 / 126
Dhyāna Yoga
ध्यान योग · अध्याय 6:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 6.31–6.36
सस्वर पाठ
पढ़ें · 6.31–6.36
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
जब मन भटक जाता है, तब मैं उसे कितनी कोमलता से वापस ले आ सकता हूँ?
सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थितः
सर्वथा वर्तमानोऽपि स योगी मयि वर्तते
॥ ६.३१ ॥
जो पुरुष एकीभाव से स्थित होकर सम्पूर्ण भूतों में आत्मरूप से स्थित मुझ सच्चिदानन्दधन वासुदेव को भजता है, वह योगी सब प्रकार से बरतता हुआ भी मुझ में ही बरतता है।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है