दिन 46 / 126

Dhyāna Yoga

ध्यान योग · अध्याय 6:

आज की लय

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सस्वर पाठ
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6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

जब मन भटक जाता है, तब मैं उसे कितनी कोमलता से वापस ले आ सकता हूँ?

यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता

योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः

॥ ६.१९ ॥

जिस प्रकार वायुरहित स्थान में स्थित दीपक चलायमान नहीं होता, वैसी ही उपमा परमात्मा के ध्यान में लगे हुए योगी के जीते हुए चित्त की कही गयी है।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है