दिन 45 / 126
Dhyāna Yoga
ध्यान योग · अध्याय 6:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 6.13–6.18
सस्वर पाठ
पढ़ें · 6.13–6.18
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
जब मन भटक जाता है, तब मैं उसे कितनी कोमलता से वापस ले आ सकता हूँ?
समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः
संप्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन्
॥ ६.१३ ॥
काया, सिर और गले को समान एवं अचल धारण करके और स्थिर होकर; अपनी नासिका के अग्रभाग पर दृष्टि जमा कर, अन्य दिशाओं को न देखता हुआ—।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है