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Karma Sannyāsa Yoga

कर्म सन्न्यास योग · अध्याय 5:

आज की लय

सुनें · 5.19–5.24
सस्वर पाठ
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पढ़ें · 5.19–5.24
6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

क्या मैं शान्ति अपने कर्म से भागकर ढूँढ़ रहा हूँ, या उसी के भीतर?

इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः

निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्ब्रह्मणि ते स्थिताः

॥ ५.१९ ॥

जिनका मन समभाव में स्थित है, उनके द्वारा इस जीवित अवस्था में ही सम्पूर्ण संसार जीत लिया गया है, क्योंकि सच्चिदानन्दधन परमात्मा निर्दोष और सम है, इससे वे सच्चिदानन्दधन परमात्मा में ही स्थित हैं।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है