दिन 4 / 126
Arjuna Viṣāda Yoga
अर्जुन विषाद योग · अध्याय 1:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 1.19–1.24
सस्वर पाठ
पढ़ें · 1.19–1.24
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
वह कौन-सा भय है जो मुझे अपना धनुष रख देने को विवश करता है?
स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत्
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयन्
॥ १.१९ ॥
और उस भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी को भी गुँजाते हुए धार्तराष्ट्रों के यानी आपके पक्ष वालों के हृदय विदीर्ण कर दिये।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है