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Arjuna Viṣāda Yoga

अर्जुन विषाद योग · अध्याय 1:

आज की लय

सुनें · 1.19–1.24
सस्वर पाठ
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पढ़ें · 1.19–1.24
6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

वह कौन-सा भय है जो मुझे अपना धनुष रख देने को विवश करता है?

स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत्

नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयन्

॥ १.१९ ॥

और उस भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी को भी गुँजाते हुए धार्तराष्ट्रों के यानी आपके पक्ष वालों के हृदय विदीर्ण कर दिये।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है