दिन 38 / 126
Karma Sannyāsa Yoga
कर्म सन्न्यास योग · अध्याय 5:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 5.1–5.6
सस्वर पाठ
पढ़ें · 5.1–5.6
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
क्या मैं शान्ति अपने कर्म से भागकर ढूँढ़ रहा हूँ, या उसी के भीतर?
अर्जुन उवाच
संन्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि
यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम्
॥ ५.१ ॥
अर्जुन बोले-हे कृष्ण! आप कर्मों के संन्यास की और फिर कर्मयोग की प्रशंसा करते हैं। इसलिये इन दोनों में से जो एक मेरे लिये भलीभाँति निश्चित कल्याणकारक साधन हो, उसको कहिये।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है