दिन 36 / 126

Jñāna Karma Sannyāsa Yoga

ज्ञान कर्म सन्न्यास योग · अध्याय 4:

आज की लय

सुनें · 4.33–4.37
सस्वर पाठ
▶
पढ़ें · 4.33–4.37
5 श्लोक · अनुवाद
→
मनन

आज मैं ऐसा क्या कर सकता हूँ, जिसके परिणाम पर अपना अधिकार जताए बिना?

श्रेयान्द्रव्यमयाद्यज्ञाज्ज्ञानयज्ञः परन्तप

सर्वं कर्माखिलं पार्थ ज्ञाने परिसमाप्यते

॥ ४.३३ ॥

हे परन्तप अर्जुन! द्रव्यमय यज्ञ की अपेक्षा ज्ञान यज्ञ अत्यन्त श्रेष्ठ है, तथा यावन्मात्र सम्पूर्ण कर्म ज्ञान में समाप्त हो जाते हैं।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है