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Jñāna Karma Sannyāsa Yoga

ज्ञान कर्म सन्न्यास योग · अध्याय 4:

आज की लय

सुनें · 4.28–4.32
सस्वर पाठ
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पढ़ें · 4.28–4.32
5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

आज मैं ऐसा क्या कर सकता हूँ, जिसके परिणाम पर अपना अधिकार जताए बिना?

द्रव्ययज्ञास्तपोयज्ञा योगयज्ञास्तथापरे

स्वाध्यायज्ञानयज्ञाश्च यतयः संशितव्रताः

॥ ४.२८ ॥

कई पुरुष द्रव्य सम्बन्धी यज्ञ करने वाले हैं, कितने ही तपस्यारूप यज्ञ करने वाले हैं तथा दूसरे कितने ही योग रूप यज्ञ करने वाले हैं और कितने ही अहिंसादि तीक्ष्ण व्रतों से युक्त यत्नशील पुरुष स्वाध्याय रूप ज्ञान यज्ञ करने वाले हैं।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है