दिन 33 / 126
Jñāna Karma Sannyāsa Yoga
ज्ञान कर्म सन्न्यास योग · अध्याय 4:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 4.18–4.22
सस्वर पाठ
पढ़ें · 4.18–4.22
5 श्लोक · अनुवाद
मनन
आज मैं ऐसा क्या कर सकता हूँ, जिसके परिणाम पर अपना अधिकार जताए बिना?
कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः
स बुद्धिमान् मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत्
॥ ४.१८ ॥
जो मनुष्य कर्म में अकर्म देखता है और जो अकर्म में कर्म देखता है, वह मनुष्यों में बुद्धिमान् है और वह योगी समस्त कर्मों को करने वाला है।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है