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Jñāna Karma Sannyāsa Yoga

ज्ञान कर्म सन्न्यास योग · अध्याय 4:

आज की लय

सुनें · 4.13–4.17
सस्वर पाठ
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पढ़ें · 4.13–4.17
5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

आज मैं ऐसा क्या कर सकता हूँ, जिसके परिणाम पर अपना अधिकार जताए बिना?

चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः

तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्

॥ ४.१३ ॥

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र -इन चार वर्णों का समूह, गुण और कर्मों के विभागपूर्वक मेरे द्वारा रचा गया है। इस प्रकार उस सृष्टि-रचनादि कर्म का कर्ता होने पर भी मुझ अविनाशी परमेश्वर को तू वास्तव में अकर्ता ही जान।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है