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Jñāna Karma Sannyāsa Yoga

ज्ञान कर्म सन्न्यास योग · अध्याय 4:

आज की लय

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सस्वर पाठ
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6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

आज मैं ऐसा क्या कर सकता हूँ, जिसके परिणाम पर अपना अधिकार जताए बिना?

श्री भगवानुवाच

इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्

विवस्वान् मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्

॥ ४.१ ॥

श्री भगवान् बोले-मैंने इस अविनाशी योग को सूर्य से कहा था, सूर्य ने अपने पुत्र वैवस्वत मनु से कहा और मनु ने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु से कहा।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है