दिन 3 / 126

Arjuna Viṣāda Yoga

अर्जुन विषाद योग · अध्याय 1:

आज की लय

सुनें · 1.13–1.18
सस्वर पाठ
▶
पढ़ें · 1.13–1.18
6 श्लोक · अनुवाद
→
मनन

वह कौन-सा भय है जो मुझे अपना धनुष रख देने को विवश करता है?

ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः

सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत्

॥ १.१३ ॥

इसके पश्चात् शंख और नगारे तथा ढोल, मृदंग और नरसिंधे आदि बाजे एक साथ ही बज उठे। उनका वह शब्द बड़ा भयंकर हुआ।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है