दिन 26 / 126
Karma Yoga
कर्म योग · अध्याय 3:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 3.24–3.28
सस्वर पाठ
पढ़ें · 3.24–3.28
5 श्लोक · अनुवाद
मनन
मैं कहाँ केवल फल के लिए ही कर्म कर रहा हूँ?
उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम्
सङ्करस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः
॥ ३.२४ ॥
इसलिये यदि मैं कर्म न करूँ तो ये सब मनुष्य नष्ट-भ्रष्ट हो जायँ और मैं संकरता का करने वाला होऊँ तथा इस समस्त प्रजा को नष्ट करने वाला बनूँ।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है