दिन 25 / 126

Karma Yoga

कर्म योग · अध्याय 3:

आज की लय

सुनें · 3.19–3.23
सस्वर पाठ
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पढ़ें · 3.19–3.23
5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

मैं कहाँ केवल फल के लिए ही कर्म कर रहा हूँ?

तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर

असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः

॥ ३.१९ ॥

इसलिये तू निरन्तर आसक्ति से रहित होकर सदा कर्तव्य कर्म को भलीभाँति करता रह। क्योंकि आसक्ति से रहित होकर कर्म करता हुआ मनुष्य परमात्मा को प्राप्त हो जाता है।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है