दिन 24 / 126

Karma Yoga

कर्म योग · अध्याय 3:

आज की लय

सुनें · 3.13–3.18
सस्वर पाठ
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पढ़ें · 3.13–3.18
6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

मैं कहाँ केवल फल के लिए ही कर्म कर रहा हूँ?

यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषैः

भुञ्जते ते त्वघं पापा ये पचन्त्यात्मकारणात्

॥ ३.१३ ॥

यज्ञ से बचे हुए अन्न को खाने वाले श्रेष्ठ पुरुष सब पापों से मुक्त हो जाते हैं और जो पापी लोग अपना शरीर पोषण करने के लिये ही अन्न पकाते हैं, वे तो पाप को खाते हैं।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है