दिन 2 / 126
Arjuna Viṣāda Yoga
अर्जुन विषाद योग · अध्याय 1:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 1.7–1.12
सस्वर पाठ
पढ़ें · 1.7–1.12
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
वह कौन-सा भय है जो मुझे अपना धनुष रख देने को विवश करता है?
अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते
॥ १.७ ॥
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! अपने पक्ष में भी जो प्रधान हैं, उनको आप समझ लीजिये। आपकी जानकारी के लिये मेरी सेना के जो-जो सेनापति हैं, उनको बतलाता हूँ।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है