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Mokṣa Sannyāsa Yoga

मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:

आज की लय

सुनें · 18.74–18.78
सस्वर पाठ
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5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?

सञ्जय उवाचइत्यहं वासुदेवस्य पार्थस्य च महात्मनः

संवादमिममश्रौषमद्भुतं रोमहर्षणम्

॥ १८.७४ ॥

सञ्जय बोले—इस प्रकार मैंने श्रीवासुदेव के और महात्मा अर्जुन के इस अद्भुत रहस्ययुक्त, रोमाञ्चकारक संवाद को सुना।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है