दिन 126 / 126
Mokṣa Sannyāsa Yoga
मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 18.74–18.78
सस्वर पाठ
पढ़ें · 18.74–18.78
5 श्लोक · अनुवाद
मनन
यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?
सञ्जय उवाचइत्यहं वासुदेवस्य पार्थस्य च महात्मनः
संवादमिममश्रौषमद्भुतं रोमहर्षणम्
॥ १८.७४ ॥
सञ्जय बोले—इस प्रकार मैंने श्रीवासुदेव के और महात्मा अर्जुन के इस अद्भुत रहस्ययुक्त, रोमाञ्चकारक संवाद को सुना।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है