दिन 125 / 126
Mokṣa Sannyāsa Yoga
मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 18.69–18.73
सस्वर पाठ
पढ़ें · 18.69–18.73
5 श्लोक · अनुवाद
मनन
यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?
न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः
भविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि
॥ १८.६९ ॥
उससे बढ़कर मेरा प्रिय कार्य करने वाला मनुष्यों में कोई भी नहीं है; तथा पृथ्वी भर में उससे बढ़कर मेरा प्रिय दूसरा कोई भविष्य में होगा भी नहीं।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है