दिन 124 / 126

Mokṣa Sannyāsa Yoga

मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:

आज की लय

सुनें · 18.64–18.68
सस्वर पाठ
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पढ़ें · 18.64–18.68
5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?

सर्वगुह्यतमं भूयः श्रृणु मे परमं वचः

इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्

॥ १८.६४ ॥

सम्पूर्ण गोपनीयों से अति गोपनीय मेरे परम रहस्य युक्त वचन को तू फिर भी सुन। तू मेरा अतिशय प्रिय है, इससे यह परम हितकारक वचन मैं तुझसे कहूँगा।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है