दिन 123 / 126
Mokṣa Sannyāsa Yoga
मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 18.59–18.63
सस्वर पाठ
पढ़ें · 18.59–18.63
5 श्लोक · अनुवाद
मनन
यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?
यदहङ्कारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे
मिथ्यैष व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति
॥ १८.५९ ॥
जो तू अहंकार का आश्रय लेकर यह मान रहा है कि 'मैं युद्ध नहीं करूंगा', तेरा यह निश्चय मिथ्या है, क्योंकि तेरा स्वभाव तुझे जबरदस्ती युद्ध में लगा देगा।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है