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Mokṣa Sannyāsa Yoga

मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:

आज की लय

सुनें · 18.49–18.53
सस्वर पाठ
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पढ़ें · 18.49–18.53
5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?

असक्तबुद्धिः सर्वत्र जितात्मा विगतस्पृहः

नैष्कर्म्यसिद्धिं परमां संन्यासेनाधिगच्छति

॥ १८.४९ ॥

सर्वत्र आसक्ति रहित बुद्धिवाला, स्पृहारहित और जीते हुए अन्तःकरण वाला पुरुष सांख्ययोग के द्वारा उस परम नैष्कर्म्यसिद्धि को प्राप्त होता है।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है